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Bollywood Villain turn Mega Star : 70 के शुरुआती दशक में बॉलीवुड में कई हीरो स्ट्रगल कर रहे थे. कुछ तो हीरो से विलेन भी बन गए. यानी निगेटिव रोल करने लगे लेकिन सफलता फिर भी हाथ नहीं आ रही थी. ऐसे ही निगेटिव रोल करने वाले एक हीरो के लिए मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी. गाने को फिल्माने के दौरान कोरियोग्राफ विलेन बने हीरो पर बहुत नाराज हुए. बाद में इसी हीरो ने बॉलीवुड पर राज किया. ऐसा स्टारडम देखा कि प्रोड्यूसर ब्लैंक चेक ऑफर करते थे. तीन साल आगे की डेट्स लेते थे. विलेन से मेगा स्टार बना हीरो कौन था, वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……….
साल था 1970. एक फिल्म बन रही थी जिसके गाने की रिकॉर्डिंग के लिए मोहम्मद रफी स्टूडियो पहुंचे. गाना उन्होंने निगेटिव रोल में नजर आने वाले हीरो के लिए गाया था. तब उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर यही विलेन बॉलीवुड का मेगा स्टार बन जाएगा. इतना बड़ा स्टार कि कोई भी हीरो उनके कद के बराबर नहीं पहुंच पाएगा. हम बात कर रहे हैं. 9 जुलाई 1971 को रिलीज हुई साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म परवाना की जिसका निर्देशन ज्योति स्वरूप ने किया था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, नवीन निश्चल, योगिता बाली, ओम प्रकाश लीड रोल में थे. शत्रुघ्न सिन्हा का एक छोटा सा रोल था. अमिताभ ने इस फिल्म में निगेटिव किरदार निभाया था. उन दिनों अमिताभ की एक के बाद एक फिल्में फ्लॉप हो रही थी. उनका गेटअप भी हीरो जैसा नहीं था. गाल पिचके हुए, लंबे बाल. ऊपर से डांसिंग स्किल भी नहीं थी. अमिताभ ने कई बार अपमान का घूंट पीया लेकिन कुछ नहीं बोले.

परवाना फिल्म के डायरेक्टर ज्योति स्वरूप थे. कहानी मधुसूदन ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले-डायलॉग आगा जानी कश्मीरी ने लिखे थे. उनका असल नाम सैयद वाजिद हुसैन रिजवी था. वैसे तो फिल्म में आरडी बर्मन का म्यूजिक लिया जाना था. पड़ोसन फिल्म के लिए आरडी बर्मन ने शानदार म्यूजिक कंपोज किया था. डायरेक्टर ज्योति स्वरूप से उनकी दोस्ती थी लेकिन फिल्म के निर्माण के दौरान दोनों में किसी बात को लेकर अनबन हो गई. ऐसे में ज्योति स्वरूप ने मदन मोहन से म्यूजिक लिया. गीतकार कैफी आजमी थे. फिल्म के कुल 5 गाने रखे गए थे. इन गानों में ‘सिमटी सी, शर्मायी सी’, ‘यूं ना शर्मा’, ‘चले लड़खड़ाके’, ‘प्यार की गली लागे भली’, ‘जिस दिन से मैंने तुमको देखा है’, और ‘ओ जमील छम्मक छल्लो’ जैसे गाने शामिल थे.

फिल्म का एक गाना ‘अरे हंसने वालो, कभी ये भी सोचो’ मोहम्मद रफी ने गाया था. गाना अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था. किसने सोचा था कि मोहम्मद रफी जिस विलेन के लिए अपनी आवाज दे रहे हैं, वही एक दिन बॉलीवुड पर राज करेगा. हालांकि फिल्म में गाने की शूटिंग के दौरान अमिताभ को जमकर डांट पड़ी. वो ठीक से डांस स्टेप नहीं कर पाए थे. कोरियोग्राफर सुरेश भट्ट ने अमिताभ से इतने फ्रस्टेट हो गए थे कि उन्होंने डायरेक्टर ज्योति स्वरूप से ‘बिग बी’ को फिल्म से निकालने के लिए कह दिया था. हालांकि प्रोड्यूसर ने उनकी बात नहीं मानी.
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फिल्म का एक गाना ‘अरे हंसने वालो, कभी ये भी सोचो’ मोहम्मद रफी ने गाया था. गाना अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था. किसने सोचा था कि मोहम्मद रफी जिस विलेन के लिए अपनी आवाज दे रहे हैं, वही एक दिन बॉलीवुड पर राज करेगा. हालांकि फिल्म में गाने की शूटिंग के दौरान अमिताभ को जमकर डांट पड़ी. वो ठीक से डांस स्टेप नहीं कर पाए थे. कोरियोग्राफर सुरेश भट्ट ने अमिताभ से इतने फ्रस्टेट हो गए थे कि उन्होंने डायरेक्टर ज्योति स्वरूप से ‘बिग बी’ को फिल्म से निकालने के लिए कह दिया था. हालांकि प्रोड्यूसर ने उनकी बात नहीं मानी.

दिलचस्प फैक्ट यह है कि नवीन निश्चल की यह दूसरी फिल्म थी. उन्होंने सावन भादो से रेखा के साथ डेब्यू किया था. योगिता बाली की भी यह डेब्यू फिल्म थी. इस फिल्म से ना तो नवीन को और ना ही योगिता बाली को कोई फायदा नहीं हुआ. हालांकि फिल्म हिट रही थी. इस फिल्म को आरएल सूरी, जय पवार और एनसी सिप्पी ने प्रोड्यूस किया था. जय पवार लीजेंड एक्ट्रेस ललिता पवार के पति थे. 2007 की जॉनी गद्दार फिल्म इस मूवी से इंस्पायर्ड थी. यह पहली फिल्म थी जिसमें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने विलेन का रोल किया. उन्होंने अपने करियर में डॉन, पुकार और आंखें तीन और फिल्मों में भी विलेन का किरदार निभाया था.

तब अमिताभ स्टार नहीं बने थे. उस साल अमिताभ बच्चन चार फिल्मों में काम कर रहे थे. तब पूरी दुनिया बेखबर थी कि यही हीरो आगे जाकर भविष्य में सुपरस्टार बनेगा और राजेश खन्ना की जगह लेगा. वैसे मोहम्मद रफी ने अमिताभ बच्चन को पहली बार ‘प्यार की कहानी’ फिल्म में आवाज दी थी. इस गाने के बोल थे : कोई और दुनिया में तुमसा हसी है’.

1971 में किशोर कुमार ने भी अमिताभ के लिए ‘संजोग’ फिल्म में आवाज दी थी. माला सिन्हा को उनके अपोजिट कास्ट किया गया था. गाने के बोल थे : रूप ये तेरा, जिसने बनाया वो, कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं. इन फिल्मों में अमिताभ का गेटअप बहुत ही खराब था. इसी तरह मोहम्मद रफी ने 1972 की फिल्म ‘एक नजर’ में अमिताभ के लिए ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा, हाल हमारा जाने ना’ गाया था. यह बात अलग है कि तीनों ही फिल्में फ्लॉप रहीं. आगे चलकर जब अमिताभ बच्चन का स्टारडम आया तो किशोर कुमार की आवाज उनकी पहचान बन गई. गाने किशोर कुमार ने गाए लेकिन पर्दे पर ऐसा लगता था जैसे अमिताभ ही गा रहे हों.

अमिताभ स्ट्रगल कर रहे थे. 1972 में ही मोहम्म्द रफी ने एक बार फिर से मासूम और स्ट्रगलर अमिताभ की फिल्म में एक गाना गाया था. फिल्म थी जंजीर. गाने के बोल थे ‘दीवाने हैं, दीवानों को ना घर चाहिए’. इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान मोहम्मद रफी रोजा रखे गए हुए थे. पानी तक नहीं पीया था. ऊपर से लता मंगेशकर ने दो-तीन रीटेक लिए थे. जब गाना रिकॉर्ड हुआ तो गीतकार गुलशन बावरा उनके पास पहुंचे और बोले कि यह गाना उन पर फिल्माया जाना है. रफी साहब चौंक गए. बोले कि यह गाना तो मैंने अमिताभ के लिए गाया है. फिर से वो स्टूडियो आए और दोबारा गाना रिकॉर्ड करवाया.

परवाना फिल्म की शूटिंग के दौरान ओम प्रकाश ने अमिताभ बच्चन के सुपरस्टार बनने की भविष्यवाणी कर दी थी. शूटिंग के पहले ही दिन ओम प्रकाश अपनी लाइनें भूल गए थे. उन्होंने पूछा था कि यह एक्टर कौन है? हालांकि शूटिंग कैसिंल कर दी गई थी. यह पहली फिल्म थी जब अमिताभ बच्चन को डांस भी करना था और गाना भी गाना था. दोनों ही काम बहुत मुश्किल थे. मोहम्मद रफी ने अमिताभ के शुरुआती दिनों में खूब साथ दिया. आगे चलकर वही अमिताभ मेगा स्टार बने. एक दौर ऐसा भी आया जब प्रोड्यूसर्स उनके घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे. तीन साल आगे की डेट्स भी खुशी-खुशी ले जाते थे. कई तो ब्लैंक चेक ऑफर करते थे.
